प्रद्युमन केस और निर्भया केस के नाबालिग दोषियों की सजा पर अफवाह की सच्चाई

प्रद्युमन केस और निर्भया केस के नाबालिग दोषियों की सजा पर अफवाह की सच्चाई

प्रद्युमन केस और निर्भया केस के नाबालिग दोषियों की सजा पर अफवाह की सच्चाई

 

 

प्रद्युमन केस और निर्भया केस के नाबालिग दोषियों की सजा:

देश दुनिया की खबरों में आजकल कभी कभी ऐसी घटनाऐं भी देखने सुनने को आती हैं जिनको सुनकर हमारी आत्मा भी कांप जाती है। ऐसी ही घटनाओं में दिसम्बर 2012 में हुआ निर्भया केस और 2017 में रेहान पब्लिक स्कूल में हुआ प्रद्युमन मर्डर केस भी हैं। ये दोनों ही घटनाएं दिल देहलाने वाली थी, लेकिन इन दोनों घटनाओं में एक बात समान थी, वह यह कि इन दोनों घटनाओं में एक नाबालिग आरोपी था।

 

निर्भया केस का सारांश:

सबसे पहले बात करते हैं निर्भया केस की। दिल्ली में 16 दिसम्बर 2012 में एक बहुचर्चित बलात्कार और हत्या की घटना को बहुत बेरहमी से अंजाम दिया गया। इसमें एक लड़की के साथ कई दरिंदो ने बलात्कार करने की कोशिश की। युवती ने उनका डटकर विरोध किया। लेकिन उन दरिंदो ने पहले तो उससे बलात्कार करने की कोशिश की। परन्तु सफल न होने पर उसके यौनांग में व्हील जैक की रॉड घुसाकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। वे सभी वहशी दरिंदे उसे बस से नीचे फेंककर भाग गये। किसी तरह उस युवती को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। वहाँ बलात्कृत युवती की Medical Treatment किया गया । परन्तु हालत में कोई सुधार न होता देख उसे 26 दिसम्बर 2012 को सिंगापुर के माउन्ट एलिजाबेथ अस्पताल ले जाया गया जहाँ उस युवती ने 29 दिसम्बर 2012 को यह शरीर सदा-सदा के लिये त्याग दिया। 30 दिसम्बर 2012 को दिल्ली लाकर पुलिस की सुरक्षा में उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

निर्भया केस के अभियुक्तों के नाम इस प्रकार हैं: राम सिंह, मुकेश सिंह, विनय शर्मा, पवन गुप्ता, अक्षय ठाकुर। 11 मार्च 2013 राम सिंह नामक मुख्य आरोपी ने सुबह तिहाड़ जेल में आत्म-हत्या कर लिया। 14 सितम्बर 2013 को इस मामले के लिये विशेष तौर पर गठित त्वरित अदालत ने चारो वयस्क दोषियों को फाँसी की सज़ा सुनायी।

लेकिन इन आरोपियों में एक आरोपी 16 दिसंबर 2012 को नाबालिग था इसलिए उसे 3 साल के लिए बाल सुधार गृह में भेजा गया और दिसंबर 2015 को उसे बाल सुधार गृह से भी रिहा कर दिया गया।

 

प्रद्युमन केस का सारांश:

2017 में गुरुग्राम के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में दूसरी क्लास के छात्र प्रद्युम्न की हत्या हो गई। इस हत्या के तुरंत बाद स्कूल के एक बस कंडक्टर को हिरासत में लिया गया लेकिन कंडक्टर ने अपना जुर्म कबूलने से इंकार केर दिया और हरियाणा सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीबीआई ने इस केस को 22 सितंबर को अपने हाथ में ले लिया। और अपनी जांच में 11वीं कक्षा के एक छात्र को दोषी पाया।

सीबीआई ने 11 वीं क्‍लास के छात्र के पकड़े जाने के बाद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा छात्र ने परीक्षा रद्द कराने के लिए मर्डर किया। यह छात्र PTM की तारीख भी आगे बढ़वाना चाहता था। यह छात्र चाकू लेकर उस दिन स्‍कूल गया था। प्रद्युम्‍न की हत्‍या के बाद आरोपी ने चाकू को फ्लश कर दिया गया था।

अब न्यायलय का यह फैसला आया है, कि प्रद्युम्‍न हत्‍याकांड के नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह केस चलेगा।

 

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न्यायपालिका पर उठे सवाल:

एक तरफ जहाँ प्रद्युम्‍न हत्‍याकांड के नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह केस चलने के कोर्ट के फैसले से आम जनता खुश है, वहीं कुछ लोग न्यायपालिका से यह भी सवाल कर रहे हैं, कि निर्भया के नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह केस क्यों नहीं चलाया गया। क्यों उसे 3 साल के बाल कारावास के बाद छोड़ दिया गया।

 

 

 

यहाँ तक कि ऐसे ही सवाल न्यायपालिका से Times Now की official वेबसाइट पर भी post किये गये।

 

 

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नाबालिग द्वारा जघन्य अपराध किये जाने पर न्यायपालिका के कानून में हुए संसोधन:

जब निर्भया केस के नाबालिग को बाल सुधार गृह भेजा गया तो जनता का आक्रोश बढ़ गया क्योकि सबको पता था वह नाबालिग आरोपी 3 साल बाद बालसुधार गृह से छूट जायेगा। तो 2014 में संसद में एक कानून पास किया गया कि अगर कोई आरोपी 16 साल से 18 साल का नाबालिग है और बलात्कार या हत्या जैसा जघन्य अपराध करता है तो न्यायपालिका उस नाबालिग पर बालिग जैसा केस चला सकती है। यह कानून 2014 में संसद में पास हो गया उसके बाद दिसंबर 2015 तक लोकसभा और राज्यसभा से भी पास हो गया।

 

 

इसी कानून के तहत प्रद्युम्न के नाबालिग हत्यारे पर भी बालिग जैसा केस चलाने का आदेश न्यायपालिका ने दिया है। क्योकि जांच में भी साफ़ पता चलता है कि हत्यारे ने बड़ी सोची समझी योजना के तहत अपराध को अंजाम दिया है।

निर्भया केस के आरोपी पर बालिग जैसा केस न चलने का कारण:

अब सवाल यह उठता है कि निर्भया केस के नाबालिग आरोपी पर बालिग जैसा केस क्यों नहीं चला क्यों उसे 3 साल बाल सुधार गृह में रखकर छोड़ दिया गया। वह इसलिए क्योकि कानून के मुताबिक किसी भी अपराधी या आरोपी के केस पर उसी कानून के आधार पर केस चलेगा जो कानून अपराध होने की तारीख तक पारित हो चुका था। मतलब अगर देश के कानून में सोमवार तक किसी काला झंडा दिखाना अपराध नहीं माना गया था और किसी ने सोमवार को दूसरे व्यक्ति को काला झंडा दिखाया और मंगलवार को नया कानून पारित होता है कि काला झंडा दिखाना अपराध है जिसमे 3 साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन उस व्यक्ति पर सोमवार तक के कानून के अनुसार कोई केस नहीं चलेगा। क्योकि व्यक्ति ने सोमवार को काला झंडा दिखाया था।

ex post facto law in indai

 

 

 

 

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